
Bagh Ka Panja - Malgudi Days by R. K. Narayan
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Bagh Ka Panja - Malgudi Days by R. K. Narayan - बाघ का पंजा - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण
"यह कहानी एक बातूनी आदमी और एक बाघ की कहानी है। कुछ शिकारी एक मरे हुए बाघ को शहर लेकर आते हैं, और कुछ बच्चों को उसकी कहानी सुनाते हैं। जब वह बातूनी आदमी एक फर्टिलाइज़र सेल्समैन था, तब वह एक बार रात में एक छोटे से गाँव के ट्रेन स्टेशन में रुका था। उसने सोने से पहले स्टेशन का दरवाज़ा खुला ही छोड़ा था क्योंकि वहां बहुत गर्मी थी। बीच रात वहां अचानक से एक बाघ घुसा और उसने आदमी को जगाया। आदमी छपाक से उठकर फर्नीचर के पीछे जाकर छिप गया, जहां बाघ का सिर्फ एक पंजा पहुंच सकता था। बाघ के पीछे हटने से पहले आदमी चाकू से उसके पंजे की तीन उंगलियां काट देता है। शहर में, बच्चे बाघ का पंजा देखने की ज़िद करते हैं। निश्चित रूप से उसके पंजे की तीन उंगलियां गायब होती हैं। शिकारियों का कहना है कि कुछ आदिवासी बाघों के बच्चों को ले जाना और उनके पंजे की उंगलियाँ काटना शुभ मानते हैं। "
लेखक आर. के. नारायण
" मालगुडी डेज" भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
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