
क़ुरान मजीद
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कुरान इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र और मूलभूत पुस्तक है। इसे मुसलमान अल्लाह का सीधा दिव्य संदेश मानते हैं, जिसे अल्लाह ने अपने अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लाहु अलैहि वसलम पर 23 वर्षों की अवधि में क्रमशः अवतरित किया है। मुसलमानों का मानना है कि कुरान हर युग और हर मनुष्य के लिए मार्गदर्शन का अनंत स्रोत है तथा यह पूर्ण और अपरिवर्तनीय दिव्य ग्रंथ है।
कुरान का मूल पाठ अरबी भाषा में है, जिसे दिव्य वाणी की मूल भाषा का दर्जा प्राप्त है। इसमें कुल 114 सूरतें और लगभग 6236 आयतें हैं, जिन्हें पढ़ने और अध्ययन की सुविधा के लिए 30 हिस्सों में विभाजित किया गया है। सूरतों को मक्की और मदीनी दो वर्गों में बांटा जाता है। मक्की सूरतें ईमान, एकेश्वरवाद, परलोक और नैतिक मूल्यों पर केंद्रित हैं, जबकि मदीनी सूरतें सामाजिक नियम, परिवार, व्यापार, न्याय और सामुदायिक जीवन के नियमों का वर्णन करती हैं।
कुरान का मुख्य सिद्धांत एकेश्वरवाद है। यह सिखाता है कि अल्लाह एक और अद्वितीय है, उसका कोई समकक्ष, पुत्र या साझेदार नहीं है। यह मनुष्य को अच्छे कर्म करना, बुराइयों से दूर रहना, दया, न्याय, सच्चाई और भाईचारे का पालन करने का उपदेश देता है। इसमें देवदूतों, सभी पैगंबरों, मृत्यु के बाद का जीवन, पुनरुत्थान और कर्मों के फल के प्रति विश्वास रखने की शिक्षाएं दी गई हैं।
हिंदी में कुरान के अनुवाद का इतिहास सदियों पुराना है। प्रारंभिक दौर में विद्वानों ने अरबी और फारसी से हिंदी में भावानुवाद किए, बाद में प्रसिद्ध इस्लामी विद्वानों ने सरल, सटीक और सर्वसुलभ हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किए। आज हिंदी अनुवाद प्रिंटेड बुक, इलेक्ट्रॉनिक संस्करण, मोबाइल ऐप और ऑडियो रूप में आसानी से उपलब्ध है।
हिंदी भाषी मुसलमानों के लिए यह अनुवाद धर्म के मूल सिद्धांतों को समझने का सबसे बड़ा माध्यम है। यद्यपि मूल अरबी पाठ ही पवित्र पाठ माना जाता है, हिंदी अनुवाद सामान्य लोगों को कुरान के संदेश को अपने जीवन में अपनाने में मदद करता है। कुरान सदैव मानव समाज के लिए ज्ञान, शांति, सदाचार और मार्गदर्शन का शाश्वत स्रोत बना हुआ है।
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